कभी खुद को ऑब्जर्व किया है
तुमने?
क्या कभी खुद को हंसते हुए
देखा है
और अपने हंसने पर
कितनी बार हंसे हो?
अपनी लाल लाल आंखों से
कितनी बार डरे हो
याद करो...
लोगों से झूठ बोलना आम बात
है
खुद से जब जब झूठ बोला है
उस वक्त तुम्हारे दिल का
बयान क्या था
ठीक से याद करो...
आईने के सामने अक्सर
खड़े होकर
चेहरे के दाग धब्बे मिटाने
की कोशिश करते पाये गये...
आईने के पार जाकर
एक भी बार
क्य खुद से मिलने की कोशिश
की
जरा बताओ तो सही...
लोगों की आलोचनाओं में
ज़िंदगी के अनमोल पल गुज़ारे
इस काम में तुम
कभी थके नहीं
रुके नहीं
सुखानुभूति से सराबोर रहे
तुम सदा...
सही और गलत की कसौटी पर
खुद को कब-कब परखा है
सोचो तो सही...

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