नाम - अरुण शेखर
कार्य-अभिनेता /रेडियो जाकी
मेरी पसन्द
फिल्में; आनंद,बावर्ची,दो ऑंखें बारह हाथ , जागते रहो......
पत्रिका ; अहा ज़िंदगी,
पुस्तकें: कनुप्रिया , अंधायुग, राम कि शक्ति पूजा , मुझे चाँद चाहिऐ.....
मेरी ग़ज़ल ...
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इसकी बात क्या करूं, ये शहर बड़ा अजीब है।
वो ही दूर है मुझसे, दिल के जो करीब है।
भीड़ इतनी कि साँसें छुएं साँसों को यहाँ ,
पर नहीं मिलता कोई कह दूं जिसे अज़ीज़ है।
उड़ते उड़ते से कदम ढौर पायेंगें भी कि नहीं ,
मंजिल कि बात कौन करे सब कुछ यहाँ नसीब है।
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